सीतापुर ! संस्कार भारती सीतापुर द्वारा डॉ० शिव गोपाल मेहरोत्रा के सिविल लाइन्स स्थित 'सुमन निवास' पर एक बैठक का आयोजन किया गया जिसमें प्रांतीय पदाधिकारियों द्वारा सीतापुर की नयी कार्यकारिणी की घोषणा की गयी! बैठक का शुभारम्भ संस्था के ध्येय गीत व सरस्वती वंदना के साथ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ! बैठक की अध्यक्षता प्रांतीय उपाध्यक्ष श्रीमती शची रानी ने की तथा मुख्य अतिथि की भूमिका का निर्वहन विभाग महिला प्रमुख श्रीमती विनोदनी रस्तोगी ने किया तथा सञ्चालन विभाग प्रमुख दिनेश मिश्र राही नें किया ! कार्यकम के मुख्य वक्ता डॉ० विश्वनाथ मिश्र रहे !
महिला कार्यकारिणी की घोषणा कुछ इस प्रकार से की गयी ! संरक्षक मंडल में श्रीमती रमा अस्थाना , श्रीमती कमला मेहरोत्रा, श्रीमती कलावती व श्रीमती निर्मला मेहरोत्रा को नामित किया गया | जिला महिला प्रमुख के पद पर श्रीमती निधि खन्ना व सह जिला महिला प्रमुख के रूप में श्रीमती मंजू मेहरोत्रा , साहित्य मंत्री डॉ० रचना भारती, नाट्य मंत्री, श्रीमती वंदना श्रीवास्तव, कला मंत्री श्रीमती दीप्ति निगम, संगीत मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा पाल, कोषाध्यक्ष श्रीमती शक्ति चौधरी व सदस्य के रूप में श्रीमती वीणा आर्य, अर्चना स्वरुप, सुनीता श्रीवास्तव, श्रीमती स्नेहलता, कंचन रस्तोगी, क्षमा रस्तोगी, बादल रस्तोगी, ममता रस्तोगी, व कु० आद्या मिश्रा को नामित किया गया |
ठीक इसी प्रकार जिला कार्यकारिणी में संरक्षक मंडल में श्री रमा रमण त्रिवेदी , मुक्तेश्वर बक्श श्रीवास्तव, सोम दीक्षित व बाबूराम अग्रवाल को नामित किया गया ! जिला प्रमुख के पद पर ओज कवि रजनीश मिश्र, अध्यक्ष अम्बरीष श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष गोपाल सागर, महामंत्री पंकज भटनागर, साहित्य मंत्री राजन पाण्डेय व पंकज पाण्डेय नाट्य मंत्री राजेश श्रीवास्तव 'अजनबी' , कला मंत्री ब्रजेश जी गुप्त "ब्रजेश" व नीरज श्रीवास्तव, संगीत मंत्री गोपाल नारायण बाजपेई व धीरज शर्मा, कोषाध्यक्ष जय प्रकाश गुप्त , प्रचार मंत्री कृष्ण कान्त दीक्षित 'वियोगी' तथा सदस्य के रूप में अखिलेश 'अखिल', राजकुमार श्रीवास्तव, रामनारायण, शिवचरण सिंह तोमर, तुलसीराम यादव व अवधेश शुक्ल को नामित किया गया !
महिला कार्यकारिणी की घोषणा कुछ इस प्रकार से की गयी ! संरक्षक मंडल में श्रीमती रमा अस्थाना , श्रीमती कमला मेहरोत्रा, श्रीमती कलावती व श्रीमती निर्मला मेहरोत्रा को नामित किया गया | जिला महिला प्रमुख के पद पर श्रीमती निधि खन्ना व सह जिला महिला प्रमुख के रूप में श्रीमती मंजू मेहरोत्रा , साहित्य मंत्री डॉ० रचना भारती, नाट्य मंत्री, श्रीमती वंदना श्रीवास्तव, कला मंत्री श्रीमती दीप्ति निगम, संगीत मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा पाल, कोषाध्यक्ष श्रीमती शक्ति चौधरी व सदस्य के रूप में श्रीमती वीणा आर्य, अर्चना स्वरुप, सुनीता श्रीवास्तव, श्रीमती स्नेहलता, कंचन रस्तोगी, क्षमा रस्तोगी, बादल रस्तोगी, ममता रस्तोगी, व कु० आद्या मिश्रा को नामित किया गया |
ठीक इसी प्रकार जिला कार्यकारिणी में संरक्षक मंडल में श्री रमा रमण त्रिवेदी , मुक्तेश्वर बक्श श्रीवास्तव, सोम दीक्षित व बाबूराम अग्रवाल को नामित किया गया ! जिला प्रमुख के पद पर ओज कवि रजनीश मिश्र, अध्यक्ष अम्बरीष श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष गोपाल सागर, महामंत्री पंकज भटनागर, साहित्य मंत्री राजन पाण्डेय व पंकज पाण्डेय नाट्य मंत्री राजेश श्रीवास्तव 'अजनबी' , कला मंत्री ब्रजेश जी गुप्त "ब्रजेश" व नीरज श्रीवास्तव, संगीत मंत्री गोपाल नारायण बाजपेई व धीरज शर्मा, कोषाध्यक्ष जय प्रकाश गुप्त , प्रचार मंत्री कृष्ण कान्त दीक्षित 'वियोगी' तथा सदस्य के रूप में अखिलेश 'अखिल', राजकुमार श्रीवास्तव, रामनारायण, शिवचरण सिंह तोमर, तुलसीराम यादव व अवधेश शुक्ल को नामित किया गया !
आप सभी को श्रावणी/रक्षाबंधन पर्व की बहुत-बहुत बधाई .............
एक छप्पय:
लेकर पूजन-थाल सवेरे बहिना आई.
उपजे नेह प्रभाव, बहुत हर्षित हो भाई..
पूजे वह सब देव, तिलक माथे पर सोहे.
बाँधे दायें हाथ, शुभद राखी मन मोहे..
हों धागे कच्चे ही भले, बंधन दिल का शेष है..
पुनि सौम्य उतारे आरती, राखी पर्व विशेष है..
कुण्डलिया:
रक्षा बंधन पर्व दे, खुशियाँ शत अनमोल,
बहना-भैया हैं मगन, मीठा-मीठा बोल.
मीठा-मीठा बोल, सभी से बढ़कर आगे.
बंधन सदा अटूट, बने राखी के धागे,
अम्बरीष यह नेह, सदा दे यह ही शिक्षा.
बहना बसी विदेश, करें मिल इसकी रक्षा..
--अम्बरीष श्रीवास्तव
संस्कार भारती सीतापुर
काया ये दीपक बने मिले नेह का तेल.
अपनेपन की ज्योति से आपस में हो मेल..
--अम्बरीष श्रीवास्तव
दीपमालिका पर्व चित्र आधरित काव्य सृजन प्रतियोगिता दिनांक ३०-१०-२०१०
प्रेरक: डा० विश्वनाथ मिश्र, कार्यक्रम संकल्पना एवं रूपरेखा संयोजन: अम्बरीष श्रीवास्तव, सहयोग: समस्त सदस्यगण व पदाधिकारी )
इस ज्योति पर्व पर रंगमंच, ललित कलाओं व साहित्य के प्रति समर्पित अखिल भारतीय संस्था संस्कार भारती सीतापुर शाखा द्वारा आर० एम० पी० डिग्री कालेज में चित्र आधारित काव्य सृजन प्रतियोगिता में विद्यार्थियों व प्रबुद्ध साहित्यकारों नें भाग लिया | जिसमें से चुनी हुई कुछ कवितायेँ प्रस्तुत की जा रहीं हैं
प्रथम स्थान
(निर्णायक डा० अरुण त्रिवेदी व डा० जयवीर सिंह )
दीपावली जैसा कोई त्यौहार भी तो हो
बस दीपकों के जलने की शुमार भी तो हो
हर व्यक्ति आज पड़ोसी के सुख में जल रहा
इस बात के लिये आप गुनहगार भी तो हो
दंगा फ़साद ना हो कभी मेरे देश में
कुछ इस तरह आवाम की आवाज़ भी तो हो
रोशनी इतनी जमीं दीपावली के दिन
दीपक किसी के घर का गुनहगार भी तो हो
हिन्दू मुसलमां में हों या सिक्ख ईसाई
ऐसा कोई इस देश में त्यौहार भी तो हो
--दीपक सिंह लखनऊ विश्वविद्यालय
द्वितीय स्थान
वर्ष बाद आया है दीवाली का त्यौहार
संग-संग लाया है खुशियों की बौछार
हम तो जला रहे हैं अब प्रीति के दिए
सभी एक दूसरे के गले प्रेम से मिलें
सच्चाई की होती है बुराई पर जीत
इस संसार में प्रचलित है यही रीत
मिठाइयों की थाल लें मेल जोल से बढ़ें
प्रकाश और श्री के लिए घर-घर जलें.
--कु० सुकृति मिश्र, कक्षा आठ
सेक्रेड हार्ट इंटर कालेज सीतापुर
तृतीय स्थान
मानवता के समग्र प्रयास से रोशन होगी दीवाली
फैल जायेगी चारों ओर खुशियों की ऐसी चादर
लगी जैसे झिलमिलाने बल्बों की ऐसी झालर
एक हमारा एक तुम्हारा दीप जले चमके चौबारा
आ सकता है कोई झोंका चली हवा को किसने रोका
दोनों हाथ लगना मिल जुल पर्व मनाना
जगमग होगी सृष्टि सारी जगमग होगी नारी
जगमग होगी दियों की पंक्ति सारी जगमग होगी किलकारी .
--कु० अनामिका वर्मा बी० एड० हिन्दू कन्या महाविद्यालय सीतापुर
साहित्यकार वर्ग
( निर्णायक डा० ममता श्रीवास्तव व डा० रजनी कान्त श्रीवास्तव)
प्रथम स्थान
मनाओ आज खुशियाँ जगमगाती रात आयी है
जलाता प्यार का दीपक बहन के साथ भाई है .
बहा कर प्रेम की गंगा बुझा दे आग नफ़रत की
मेरे भाई यही दीपावली पैगाम लाई है .
हमारी एकता को भंग कर सकता नहीं कोई
जुदा होंगें नहीं हरगिज़ कसम हमने ये खाई है .
नदीम अम्बरीष सागर शचीरानी या राही हों
मेरी जानिब से उन सबको दीवाली की बधाई है .
--नदीम सीतापुरी
९, शेख सराय पुराना सीतापुर, मोबाइल ०९४१५५२५५१६
द्वितीय स्थान
हिन्दू संस्कृति और सभ्यता स्वस्तिक भावों का दर्पण है
परम्पराओं का पालन ही भारत का गौरव दर्शन है
भू पर आज प्रकाश पर्व है ज्योतित हुई अमावस काली
दीपों से श्रृंगार किया है जगमग-जगमग है दीवाली
श्री लक्ष्मी गणेश पूजन से निर्मल धन-मन सदा प्राप्त हो
ज्योतिर्गमय करे सद्प्रेरित वातावरण में स्नेह व्याप्त हो
दीपों का सन्देश अनूठा गाँव नगर को स्वच्छ बनाओ
जन जन का अज्ञान मिटाकर साक्षरता की ज्योति जलाओ .
-- गौरी शंकर वैश्य 'विनम्र'
पोस्टमास्टर सीतापुर २६१००१
तृतीय स्थान पर दो साहित्यकार रहे
तृतीय स्थान १
एक है सबका खुदा और एक ही पानी हवा
नाम मनु आदम है जिसका बस वही सबका पिता
ये बहन भाई का रिश्ता तो बहुत मज़बूत है
कोई कर सकता नहीं इसको कभी हरगिज़ जुदा
हैं सजाएँ दीप दोनों नें मिल कर आज ये
सारी दुनिया के लिए ये शुभ निशाँ है बन गया
आसमां से से जैसे तारे आ गए हों सब के सब
इस तरह महफूज़ दीवाली में हर एक घर सजा
-- महफूज़ रहमानी सीतापुर
तृतीय स्थान २
बहन भाई दीवाली में दिए मिलकर जलाते हैं ,
खुशी से देखने वाले नहीं फूले समाते हैं.
पटाखे फुलझड़ी की रोशनी हर सू बिखरती है,
ये लगता है जमीं पर चाँद तारे जगमगाते हैं .
लहर खुशियों की हर जानिब है बहती प्रेम की गंगा,
मोहब्बत रंग लाई है अब आंसू छलके जाते हैं.
इकठ्ठा कर ले ए महबूब धनतेरस में धन तू भी,
हजारों लोग इस अवसर पे किस्मत आजमाते हैं.
-- महबूब गोंडवी, सीतापुर, मोबाइल ०९८८९४११२००
सराहनीय रचनायें:
दीवाली का पर्व है रख दो मग- मग दीप.
जीवन रंग न रखिये मन के बनो महीप..
जले दीप से दीप ये घट घट करो प्रकाश.
अन्धकार मिट जाएगा नव जीवन की आस..
शुभ ही शुभ हो नव जगत जग-मग होवे शाम.
रावण जगती से मिटा जग में छाए राम ..
अब ना जग में आ सके देखो काली रात.
बाधाएं सब जल उठें उत्सव की हो बात..
--कु० अभव्या चौहान कक्षा: नौ
केन्द्रीय विद्यालय सीतापुर
घर आँगन से तम को हर लो कहने आयी आज दीवाली
मन के द्वारे दीपक धर लो कहने आयी आज दीवाली
प्रेम सुधा हर दम बरसना कमजोरों का हाथ बंटाना
कण-कण को आलोकित कर लो कहने आयी आज दीवाली
जग में झूठ नहीं फलता है सच का राज सदा चलता है
सच्चाई से जीत लो सबको कहने आयी आज दीवाली
अंधियारे का मुख हो काला प्यार-प्रीति की जपना माला
ह्रदय-ह्रदय में आज उतर लो कहने आयी आज दीवाली..
--कु० अर्पिता सिंह एम० ए० प्रथम वर्ष ( राजनीति विज्ञान )
आर० एम० पी० डिग्री कालेज सीतापुर
दीपों का यह पर्व दीवाली
धरती पर छाई खुशहाली
बेटा है घर की दीयाली
बेटी है उसकी उजियाली
दोनों से ही मिलकर होती
घर की दीवाली उजियाली
दुःख को करती दूर दीवाली
घर- घर की खुशियाँ दीवाली.
--श्रीमती अनुपमा श्रीवास्तव
१, शिवपुरी सीतापुर
दिल की आँखों से अगर इस चित्र को देखेंगें आप ,
तब कहीं दीपावली के मर्म को समझेंगें आप.
राम की घर वापसी के हर्ष में होकर विभोर,
हार्दिक स्वागत में उनके लीन हो जायेंगे आप .
हर जगह करके सफाई और सजावट बेमिसाल ,
हर दिशा में रोशनी के फूल बरसायेंगे आप.
आप भी उपरोक्त खुशियों में हों शामिल ए जिया ,
देख लेना राम भक्तों में गिने जायेंगे आप.
--जिया रहमानी २५९, मिर्दही टोला सीतापुर
मोबाइल : 08858609915
वैसे हम छोटे हैं पर हममें भी है उत्साह बहुत
एक दिया ही काफी है फैलाने को प्रकाश बहुत
इस बार दीवाली में मेरे ये लाखों मिलकर चमकेंगें
मुन्नी और पड़ोसी घर को उजियारे से भर देंगे
जब दीप मालिका बनके ये आपस में सब मिल जायेंगे
हर द्वारे लक्ष्मी गणेश को खुद ही ये ले आयेंगे
हर आँगन में मंगल होगा पैसा होगा जेबों में
खूब पटाखें छोड़ेंगे हम खील बताशे खायेंगे.
--इं गोपाल 'सागर'
राम नगर सीतापुर
मोबाइल : ०९४५२८८१६२२
इस प्रतियोगिता को सफल बनाने हेतु हम सभी प्रतिभागियों , निर्णायकों व सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं |
सीतापुर (सी० सं०)| इस ज्योति पर्व दीपावली के मंगलकारी अवसर पर रंगमंच, ललित कलाओं व साहित्य के प्रति समर्पित अखिल भारतीय संस्था संस्कार भारती सीतापुर शाखा द्वारा आर० एम० पी० डिग्री कालेज में चित्र आधारित काव्य सृजन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग सभी कालेज के विद्यार्थियों व प्रबुद्ध साहित्यकारों नें भाग लिया | कार्यक्रम की अध्यक्षता डा० एस० पी शाक्य नें की , मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार शांति शरण 'व्यंग्य' तथा विशिष्ट अतिथि बनकर गौरी शंकर वैश्य 'विनम्र' नें मंच को सुशोभित किया | इस कार्यक्रम का सञ्चालन व संयोजन संस्था के महामंत्री अम्बरीष श्रीवास्तव नें किया |
सर्वप्रथम दीप प्रज्ज्वलन ले पश्चात् कार्यक्रम का शुभारम्भ संरक्षक मुक्तेश्वर बक्श श्रीवास्तव की वाणी वंदना से हुआ तद्पश्चात समस्त आगंतुकों व अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्था के जिला संयोजक रजनीश मिश्र नें संस्था के कार्य व उद्देश्य पर प्रकाश डाला इसके बाद प्रांतीय महिला प्रमुख व जिला महिला प्रमुख विनोदनी रस्तोगी द्वारा ध्येय गीत का गान किया गया | कार्यक्रम के मुख्य वक्ता इं० गोपाल सागर रहे |
छात्र वर्ग की प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर लखनऊ विश्विद्यालय के दीपक सिंह, द्वितीय स्थान पर सेक्रेड हार्ट इंटर कालेज की कु० सुकृति मिश्र एवं तृतीय स्थान पर हिन्दू कन्या महाविद्यालय की कु० अनामिका वर्मा रहीं | इसी प्रकार साहित्यकार वर्ग की प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर नदीम सीतापुरी , द्वितीय स्थान पर गौरी शंकर वैश्य 'विनम्र' व तीसरे स्थान पर क्रमशः महफूज़ रहमानी व महबूब गोंडवी रहे जिन्हें कार्यक्रम अध्यक्ष डा० शाक्य द्वारा प्रमाण पत्र व पुरुस्कार दिए गए | निर्णायकों की भूमिका का सफल निर्वाहन डा० अरुण त्रिवेदी, डा० जयवीर सिंह , डा० ममता श्रीवास्तव व द० रजनीकांत श्रीवास्तव द्वारा किया गया | अंत में डा० शाक्य के अध्यक्षीय भाषण के उपरांत संस्था के अध्यक्ष दिनेश मिश्र राही नें सभी के प्रति आभार प्रदर्शन किया |
इस अवसर पर साहित्यकार इं० गोपाल सागर, मुक्तेश्वर बक्श श्रीवास्तव, राज कुमार श्रीवास्तव, राजन पाण्डेय, सुरेश चन्द्र मिश्र, अखिलेश अखिल, पंकज पाण्डेय, जिया रहमानी , उदय प्रताप त्रिवेदी, प्रेम बिहारी लाल श्रीवास्तव , श्याम बिहारी लाल श्रीवास्तव, राम सागर शुक्ल 'चच्चू', शिव कुमार पाल व नितिन अग्रवाल व विद्यार्थीगण उपस्थित थे |
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सप्ताह की श्रेष्ठ पोस्ट की उद्घोषणा
कहा जाता है कि प्रतिष्ठा, प्रशंसा और प्रसिद्धि की चाहत सभी को होती है , किन्तु सही मायने में प्रशंसा तब सार्थक समझी जाती है, जब आप किसी को पहले से नहीं जानते हों अचानक किसी मोड़ पर वह मिल जाए और आप उसके सद्गुणों की प्रशंसा करने को बाध्य हो जाएँ । ऐसा ही हुआ कुछ हमारे साथ ।
विगत दिनों यह घोषणा की गयी थी कि प्रत्येक सोमवार को हम लखनऊ ब्लोगर एसोशिएसन पर प्रकाशित किसी एक पोस्ट को सप्ताह की श्रेष्ठ पोस्ट का अलंकरण देंगे । आज पहला दिन है और हम जिस पोस्ट को सप्ताह की पोस्ट का अलंकरण देने जा रहे हैं उसके पोस्ट लेखक को मैंने पहली बार पढ़ा और उस पहले पोस्ट ने मुझे आकर्षित होने पर मजबूर किया वह पोस्ट है -
दिल से कर लो मेल..
एक संग होती रहे पूजा और अजान।
सबके दिल में हैं प्रभू वे ही सबल सुजान..
निर्गुण ब्रह्म वही यहाँ वही खुदा अल्लाह.
वही जगत परमात्मा उनसे सभी प्रवाह..
झगड़े आखिर क्यों हुए क्यों होते ये खेल.
मंदिर-मस्जिद ना करो दिल से कर लो मेल..
पंथ धर्म मज़हब सभी लगें बड़े अनमोल.
इनसे ऊपर है वतन मन की आँखें खोल..
बाँट हमें और राज कर हमें नहीं मंजूर.
सच ये हमने पा लिया समझे मेरे हुजूर.
बहुतेरी साजिश हुई नहीं गलेगी दाल.
एक रहेगा देश ये नहीं चलेगी चाल॥
श्री अंबरीश श्रीवास्तव की यह कविता सांप्रदायिक सद्भाव को समर्पित है और मुझे इस कविता को सप्ताह की श्रेष्ठ कविता या फिर श्रेष्ठ पोस्ट की घोषणा करते हुए अपार ख़ुशी की अनुभूति हो रही है ।
30 जून 1965 में उत्तर प्रदेश के जिला सीतापुर के “सरैया-कायस्थान” गाँव में जन्मे कवि अम्बरीष श्रीवास्तव ने भारत के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान 'भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान' कानपुर से विशेषकर भूकंपरोधी डिजाईन व निर्माण के क्षेत्र में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। कवि जनपद सीतापुर के प्रख्यात वास्तुशिल्प अभियंता एवं मूल्यांकक होने के साथ राष्ट्रवादी विचारधारा के कवि हैं। कई प्रतिष्ठित स्थानीय व राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं व इन्टरनेट पर जैसे अनुभूति, हिंदयुग्म, साहित्य शिल्पी, साहित्य वैभव, स्वर्गविभा, हिन्दीमीडिया, विकिपीडिया, रेनेसा, ड्रीमस-इंडिया, शिक्षक प्रभा व मज़मून आदि पर अनेक रचनाएँ प्रकाशित हैं। ये देश-विदेश की अनेक प्रतिष्ठित तकनीकी व्यवसायिक संस्थानों जैसे "भारतीय भवन कांग्रेस" , "भारतीय सड़क कांग्रेस", "भारतीय तकनीकी शिक्षा समिति", "भारतीय पुल अभियंता संस्थान" व अमेरिकन सोसायटी ऑफ़ सिविल इंजीनियर्स, आर्कीटेक्चरल इंजीनियरिग इंस्टीटयूट, स्ट्रक्चरल इंजीनियरिग इंस्टीटयूट आदि व तथा साहित्य संस्थाओं जैसे "हिंदी सभा", हिंदी साहित्य परिषद्" (महामंत्री ) तथा "साहित्य उत्थान परिषद्" आदि के सदस्य हैं। प्राप्त सम्मान व अवार्ड:- राष्ट्रीय अवार्ड "इंदिरा गांधी प्रियदर्शिनी अवार्ड 2007", "अभियंत्रणश्री" सम्मान 2007 तथा "सरस्वती रत्न" सम्मान 2009 आदि
.....इस अवसर पर श्री अंबरीश श्रीवास्तव जी के लिए ऋग्वेद की दो पंक्तियां समर्पित है कि - ‘‘आयने ते परायणे दुर्वा रोहन्तु पुष्पिणी:। हृदाश्च पुण्डरीकाणि समुद्रस्य गृहा इमें ।।’’अर्थात आपके मार्ग प्रशस्त हों, उस पर पुष्प हों, नये कोमल दूब हों, आपके उद्यम, आपके प्रयास सफल हों, सुखदायी हों और आपके जीवन सरोवर में मन को प्रफुल्लित करने वाले कमल खिले।
अनंत आत्मिक शुभकामनाओं के साथ-
शुभेच्छु-
रवीन्द्र प्रभात
अध्यक्ष : लखनऊ ब्लोगर एसोशिएसन
प्रस्तुतकर्ता: रवीन्द्र प्रभात 22 पाठकों ने अपनी राय दी है, कृपया आप भी दें! इसे ईमेल करें इसे ब्लॉग करें! Twitter पर साझा करें Facebook पर साझा करें Google Buzz पर शेयर करें
Labels: सप्ताह की श्रेष्ठ पोस्ट
वे ,
जो मैंने लगाई थीं ,
मुझसे बड़ी हो गयी हैं !
सब,
मेरे ही खिलाफ
तन कर खड़ी हो गयी हैं !
मैं इन्हें खोलने चलता हूँ ,
तो ये बोलती हैं !
बंधे ही बंधे
बहुत कुछ खोलती हैं !
मैं इनकी आवाज़ से
डरता हूँ !
मैं जानता हूँ,
कि इससे
मैं कुछ घटता हूँ !
लेकिन मैं
इन्हें बिना खोले
जी नहीं सकता
और गांठें हैं
कि बिना बोले
खुल नहीं सकतीं !
-डॉ. अरुण त्रिवेदी
एक संग होती रहे पूजा और अजान.
सबके दिल में ईश हैं वे ही सबल सुजान..
निर्गुण ब्रह्म वही यहाँ वही खुदा अल्लाह.
वही जगत परमात्मा उनसे सभी प्रवाह..
झगड़े आखिर क्यों हुए क्यों होते ये खेल.
मंदिर-मस्जिद ना करो दिल से कर लो मेल..
पंथ धर्म मज़हब सभी लगें बड़े अनमोल.
इनसे ऊपर है वतन मन की आँखें खोल..
बाँट हमें और राज कर हमें नहीं मंजूर.
सच ये हमने पा लिया समझे मेरे हुजूर..
बहुतेरी साजिश हुई नहीं गलेगी दाल.
एक रहेगा देश ये नहीं चलेगी चाल..
--अम्बरीष श्रीवास्तव